Tuesday, 20 May 2014

घायल

तमाम जिस्म  ही घायल था घाव ऐसा था
कोई ना जान सका रख रखाव ऐसा  था



मसला दिल का किसी के काैन सुलझाए यहाँ 
सब हैं अपने मसलों में उलझे हुऐ घबराए हुऐ 

तनकीद अच्छी बात है
नुक़्ताचीनी बुरी । और
ऐबजोई बदतरीन
मगर तनकीद की आड़ में दोनों ही काम होते हैं 

Thursday, 17 April 2014

Dard aapna aapna








Nafs ko aanch par wo bhi umar bhar rakhna,
Bahut muhaal hai aapne ko motbar rakhna.

Saturday, 15 March 2014

कुछ अलग अलग

बड़े  मज़े से गुज़रती है बेख़ुदी में अपनी , ख़ुदा वो दिन ना दिखाए कि होशियार हों हम ।                    



कुछ फ़िकरे ज़माना है तो कुछ अपनी फ़िक्र है
हर शख़्स गिरफ़्तार गमे शामो-सहर है